Sanatan

सनातन शनिचर Sanatan Saturday
आज Bihani Children’s Academy में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सनातन धर्म विषय पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता श्री धर्म संघ संस्कृत महाविद्यालय श्री गंगानगर के आचार्य मुकुंद त्रिपाठी थे।
इस चर्चा में छात्र-छात्राओ ने भाग लिया। आचार्य महोदय ने सनातन धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि- सनातन धर्म संसार का सर्वाधिक पुराना धर्म है। जो भगवान नारायण की प्रेरणा से भगवान ब्रह्मा ने उत्पन्न किया। सनातन संस्कृति विश्व की प्राचीन संस्कृति है। आचार्य श्री ने विज्ञान को सनातन धर्म की उपज बताते कहा कि हमारे वेदों में सभी प्रकार के विज्ञान जैसे चिकित्सा शास्त्र ,धातुविज्ञान , खगोल विज्ञान, आयुर्वेद या विमान शास्त्र हो, प्राचीन समय से ही उपलब्ध रहें हैं। फोटोस्टेट मशीन की बात उन्होंने संस्कृत के श्लोक पूर्ण इदम के उदाहरण से बताया कि ये सोच भी वैदिक विज्ञान की ही देन है। सनातन धर्म को विज्ञान की दृष्टि से देखना अनुचित है। मनुष्य यही भूल करते हैं। आचार्य श्री ने बच्चों को विद्यार्थी जीवन के कर्तव्य बताते हुए कहा कि माता,पिता ,वृद्धों और गुरुजनों का अभिवादन करने से मनुष्य का धन, आयु, बल और बुद्धि बढ़ती है। इसलिए आप सबको इनका अभिवादन करना चाहिए। कार्यकम के अंत में बच्चों ने आचार्य श्री से सनातन धर्म से संबंधी अपनी जिज्ञासाओं को प्रश्नों के रूप में पूछा। जिनमें से प्रमुख प्रश्न निम्नलिखित हैं-
1.विद्यार्थियों किस मंत्र का जाप करें?
आचार्य श्री ने सरस्वती माता,भगवान शिव और गणेश के मंत्रों को 2.विद्यार्थियों के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया।
मन को स्थिर एवम् एकाग्र कैसे करें?
आचार्य श्री ने बताया कि सत साहित्य पढ़ने से मन को स्थिर एवम् एकाग्र किया जा सकता है।
3.कौनसी दिशा पढ़ने के लिए सर्वश्रेष्ठ है ?
आचार्य श्री ने बताया कि उत्तर दिशा पढ़ने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
4.लोभ, मद, मोह, क्रोध आदि को कैसे रोका जाए?
आचार्य श्री ने बताया कि मन को नियंत्रण में करके ही इन्हें रोका जा सकता है।
5.व्रत क्या है?
आचार्य श्री ने बताया कि इंद्रियों का निग्रह व्रत है।
6.मौन व्रत के क्या लाभ है?
आचार्य श्री ने बताया कि मौन व्रत करने से हमें अपने बारे में जानने को मिलता है।
ऐसे अनेक प्रश्न बच्चों ने आचार्य श्री से पूछ कर सनातन धर्म संबंधी अपनी जिज्ञासाओं का शमन किया। कार्यक्रम के अंत में मंच संचालक मधुसूदन कौशिक ने एकेडमी के पावन परिसर में पधारने पर आचार्य श्री का एकेडमी परिवार की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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